सारी नज्में ! सारी रूबाई मैं ! तुम तक ! छोड़ जाऊंगी, तुम हाथ तो बढाओ मैं जिन्दगी का रूख मोड़ जाऊंगी !! ग़ज़ल हूं मैं ! ग़ज़ल हूं मैं ! गीत की तरह ! तुम्हारी जिन्दगी में शामिल हूं , तुम ! ह...
हर कोई यहां मुझसे बहुत बडा है अर्ची अपने जूते की नोक पर रखकर जब जी चाहा मेरी औकात नाप लेता है ! मैं फकीर फासला-ए-शहर नंगे पांव तय करती रही कहानी तो शहर खुद-बखुद लिख देता है ! ना रा...
आजकल बात नहीं होती, बड़ा सस्ता सा हो गया है दिलों का रिश्ता, पास रहकर भी सदियों तक : मुलाकात नहीं होती ... आजकल बात नही होती ......!! यूं अपने में ही खोए हुए चले जा रहे हो किस राह तुम मुसाफ...
हर कदम पर ठुकरा रहे हो ! किसी रोज ! अजनबी की तरह मिलूं तो न कहना !! अश्क आंखों में मेरी जो सजा रहे हो किसी रोज दरिया होकर मिलूं तो न कहना !! गुरूर इतना न करो अर्ची की गुस्ताखिंया हो जा...
क्या सच में मुकद्दर का लिखा होता है ? बता ऐ वक्त ! तूं बता मुझे मुकद्दर लिखने वाला किस जात का होता है ?? क्या खता थी मेरी ! क्या गुनाह किया मैने जो हथेलियों पर मेरी कोई रेखा न सजीं , क...
गर आपकी जिंदगी कहानी न हुई तो : आप कहानी क्या खाक लिखेंगे? आईए जिंदगी से गुफ्तगूं करें कि : जिंदगीं को एक कहानी करें मानिए यकीन बूंद बूंद ओश पर ख्वाब लिखेगें पोर - पोर - पोर जिंद...
इस शहर के ! मेरे माजी मैने कई रंग देखे हैं , कभी फीका देखे हैं , कभी शोख-ए-चटख रंग देखें हैं, इस शहर के ..........................!! मत पूछिए ! किस कदर बदला है मौसम-ए-मिजाज यहां पूस की ठिठुरती सर्दियों में- ज...