अपने तत्कालीन साहित्यकारों की उपेक्षा के शिकार महान राष्ट्रवादी चिन्तक, विचारक, एवम उपन्यासकार वैद्य गुरूदत्त के लेखन कौशल पर एक समीक्षा : ================================ वैद्य गुरूदत्त अपने समय...
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एक मध्यप्रदेश के शख्स ने दस वर्ष तक 'शिवजी' की कठिन तपस्या की । शंकरजी प्रकट हुए । पूछा... 'बोल क्या वर चाहिये'? । दस साल तक घर से दूर उस जंगल में बैठे उस शख्स ने दो मिनिट सोचकर कहा ... 'पोहा खाना है '..ऊपर से रतलामी सेव डालकर..साथ मे जलेबी भी. 😂😂 इस ब्रह्मांड की पोहे के बिना कल्पना करना भी कठिन है 😂
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