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Lala lajpat rai

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Home   »   हस्तक्षेप   »   आपकी नज़र   »   भगतसिंह का लेख – लाला लाजपत राय और नौजवान Shaheed E Azam Bhagat Singh " data-medium-file="https://i2.wp.com/www.hastakshep.com/old/wp-content/uploads/2019/03/Shaheed-E-Azam-Bhagat-Singh.jpg?fit=300%2C200&ssl=1" data-large-file="https://i2.wp.com/www.hastakshep.com/old/wp-content/uploads/2019/03/Shaheed-E-Azam-Bhagat-Singh.jpg?fit=600%2C400&ssl=1" srcset="https://i2.wp.com/www.hastakshep.com/old/wp-content/uploads/2019/03/Shaheed-E-Azam-Bhagat-Singh.jpg?zoom=2&resize=600%2C330 1200w, https://i2.wp.com/www.hastakshep.com/old/wp-content/uploads/2019/03/Shaheed-E-Azam-Bhagat-Singh.jpg?zoom=3&resize=600%2C330 1800w" data-lazy-loaded="1" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px"> भगतसिंह का लेख – लाला लाजपत राय और नौजवान हस्तक्षेप   March 24, 2019   आपकी नज़र ,  शब्द ,  हस्तक्षेप   Leave a comment (यह वह दौर था जब कौंसिल के चुनावों में लाला लाजपत राय ने कांग्रेस का साथ छोड़कर उ...

मा अर्याम्बा और आदि शंकराचार्य

मा  अर्याम्बा  और आदि शंकराचार्य   शंकराचार्य जी को,आदिशंकराचार्य भी कहा जाता है आप साक्षात् भगवान शिव के अवतार थे . आपने परमेश्वर के विभिन्न रूपों से लोगो को अवगत कराया जिसमे, आपने यह बताया कि, ईश्वर क्या है ? ईश्वर का जीवन मे महत्व क्या है ? यह ही नही आपने अपने जीवनकाल मे, ऐसे कार्य किये जो बहुत ही सरहानीय है और भारत की, अमूल्य धरोहर के रूप मे आज भी है . आपने हिन्दू धर्म को बहुत ही खूबसूरती से एक अलग अंदाज मे निखारा, इसी के साथ अनेक भाषाओं मे, आपने अपने ज्ञान का प्रकाश फैलाया . आपने विभिन्न मठो की स्थापना की इसी के साथ कई शास्त्र, उपनिषद भी लिखे .  आदिशंकराचार्य जी का जीवन परिचय ( Shankaracharya history ) आदिशंकराचार्य जी साक्षात् भगवान का रूप थे . आप केरल के साधारण ब्राह्मण परिवार मे जन्मे थे . आपकी जन्म से आध्यात्मिक क्षेत्र मे रूचि रही है जिसके चलते, सांसारिक जीवन से कोई मोह नही था . आपको गीता,उपन्यास, उपनिषद् , वेदों और शास्त्रों का स्वज्ञान प्राप्त था, जिसे आपने पूरे विश्व मे फैलाया. आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय  जन्म 788 ई. मृत्यु 820 ई. जन्मस्थान केरल क...

बचपन मे शादी का क्रेज ================एक छोटी बच्ची उम्र यही कोई 5/6 वर्ष दौर 1988 का खेलना बहुत पसन्द खेल मे भी गुड्डे गुडिया की शादी विशेष पसन्द ! अडोस - पडोस - रिश्ते मे जब भी किसी की शादी हो तो घर मे अपने बडो से रोज बस एक ही सवाल : दादी मेरा दुल्हा कब आएगा ? : बडी अम्मा मेरा दुल्हा कब आएगा ? : दद्दा मेरा दुल्हा कब आएगा ?: चाचा मेरा दुल्हा कब आएगा ? : पापा मेरा दुल्हा कब आएगा ? आजकल शादी का मौसम शुरू हो गया है तो अपने गली मुहल्ले रिश्ते मे शादी व्याह का माहौल देखकर मेरे बचपन की कुछ ऐसी यादे अचानक मुझे अपनी तरफ खींचती चली गई यथा : उस समय परिवार सँयुक्त था । बडी दादी, छोटी दादी, सहित पिता का दो बडे भाईयो वाला हमारा पूरा परिवार एक ही घर मे, एक ही छत के नीचे रहता था और घर से लगे दूसरे घर मे रहता था मेरे बाबा के चाचा जी का परिवार । दोनो घर मेरे खेलने के अद्भुद् अड्डे थे । जैसा कि मैने जो बचपन जीया है मेरा वह बचपन वाला अनुभव कहता है सँयुक्त परिवार मे हमारे बडो के बीच भले किसी तरह का असंतोष होता है पर हम बच्चो की आपस मे बडी मौज रहती है । बचपन मे यह मौज मेरी भी थी ! चलिए अब आ जाते है मुख्य बिन्दु शादी पर, मेरे बचपन वाली शादी पर ! शादी के प्रति मेरे अटूट लोभ और आकर्षण पर वह भी तब जब मुझे शादी का मतलब केवल इतना पता था की शादी जब होती है एक दुल्हा आता है उसके साथ बहुत सारे बराता आते है । कुछ डाँट डपट के साथ हम बच्चो को फ्रूटी पीने के बाद फ्रूटी के खाली पैकेट को पैरो तले रखकर उसपर जोर से पैर मारने फोडने की पूर्ण आजादी होती है । बडे लिम्का पीते है अम्मा नयी साडी और जेवर से लकदक होती है दीदी की दोस्ते और दादी जाने क्या क्या बात करती है ! और सुबह जब मै सोकर जगती हूँ तो पाती हूँ फूलो से सजी बडी गाडी मे रात को आने वाला दुल्हा दुल्हन को अपने साथ۔लेकर अपने घर चला गया ! बडी दुविधा दुल्हा दुल्हन को अपने साथ लेकर क्यो चला गया ! दौडकर दादी के पास जाती और सवाल करती दादी दुल्हा कहाँ गया ? दादी का जवाब होता : दुल्हा अपने घर चला गया फिर सवाल : दादी मेरी शादी कब होगी ? दादी का जवाब : जब तुम बडी हो जाओगी फिर मेरा सवाल : दादी मै बडी कब होऊँगी दादी का जवाब : तुम्हारे बाप के पास खूब सारे रूपए होगे । मेरा सवाल : दादी रूपए का क्या होगा ? दादी का जवाब : रूपए से ही दुल्हा आएगा फिर मेरा सवाल : दादी दुल्हा रूपए से क्यो आएगा ? दादी का जवाब : क्योकि वह तुम्हे लेने खाली हाथ थोडे आएगा , फिर मेरा सवाल : दादी पापा से कहना मेरे लिए रूपए वाला दुल्हा नही लाएगे । दादी का जवाब : रूपए वाला दुल्हा नही आएगा तो तुम दुल्हन कैसे बनोगी ? फिर मेरा सवाल : दादी मुझे मेरी अम्मा की लाल वाली साडी पहना देना, बडी अम्मा की छम छम बजने वाली पायल पहना देना, और अपने बक्से से

बचपन मे शादी का क्रेज  ================ एक छोटी बच्ची उम्र यही कोई 5/6 वर्ष  दौर 1988 का  खेलना बहुत पसन्द  खेल मे भी गुड्डे गुडिया की शादी विशेष पसन्द !  अडोस - पडोस - रिश्ते मे जब भी किसी की शादी हो तो  घर मे अपने बडो से रोज बस एक ही सवाल  : दादी मेरा दुल्हा कब आएगा ?  : बडी अम्मा मेरा दुल्हा कब आएगा ?  : दद्दा मेरा दुल्हा कब आएगा ? : चाचा मेरा दुल्हा कब आएगा ?  : पापा मेरा दुल्हा कब आएगा ?  आजकल शादी का मौसम शुरू हो गया है तो अपने गली मुहल्ले रिश्ते मे शादी व्याह का माहौल देखकर मेरे बचपन की कुछ ऐसी यादे अचानक मुझे अपनी तरफ खींचती चली गई यथा :  उस समय परिवार सँयुक्त था । बडी दादी, छोटी दादी,  सहित पिता का दो बडे भाईयो वाला हमारा पूरा परिवार एक ही घर मे, एक ही छत के नीचे रहता था और घर से लगे दूसरे घर मे रहता था मेरे बाबा के चाचा जी का परिवार । दोनो घर मेरे खेलने के अद्भुद् अड्डे थे ।  जैसा कि मैने जो बचपन जीया है मेरा वह बचपन वाला अनुभव कहता है सँयुक्त परिवार मे हमारे बडो के बीच भले किसी तरह का असंतोष होता है पर हम ब...

बसंत

याद आता है वो बसंत...... भारत में पूरे साल को छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। फूलों पर भर भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु देवी, सरस्वती और कामदेव की पूजा होती| यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी के नाम से भी उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। बसंत का प्रतीकात्मक शुभ रंग पीला है और इस दिन पीले चावल और लड्डू का अपना ही महत्व है। मुझे याद है जब हमारे गांव में वसंत आता था तो आम के पेड़ों में बौर खोजे जाते थे, और उस बौर की सुगंध आज भी मन में बसी हुई है| हमारे नए पीले रंग वाले कपड़े आते, दादी-बाबा से लेकर मां-पिता, बुआ, बहन-भाई सब एक ही रंग में रंगे होते जैसे सब ने कोई यूनिफार्म पहन रखी हो।...

बचपन मे दादी के मुँह से एक लोक कहावत बहुधा साँझ सवेरे सुना करती थी मै यथा : बसो तेरी गोद में, उखाडों तेरी दाढ़ी ॥ आज दिल्ली मे अराजकता का जो लाइव कास्ट हुआ उसने उपरोक्त कहावत को पूर्णत: चरितार्थ कर दिया !क्या किसी देश का लोकतंत्र इतना उदार हो सकता है कि कुछ लोग देश के एक विशेष हिस्से को, एक विशेष भूभाग को देश से अलग करने की सामूहिक घोषणा कर रहे हो और देश धैर्य धरे मौन उनकी मूर्खतापूर्ण अराजकता को सहन कर रहा है वह भी तब जब मात्र एक दिन बाद हम दुनिया के सबसे सुंदर संविधान का स्थापना दिवस ( बर्थ डे ) मनाने की तैयारी मे लगे हो ? आज दिल्ली मे जो हुआ है उसे केवल हम आप ही नही देख रहे है बल्कि उसपर आज सारी दुनिया की नजर पहुँची है ! आज केवल हम आप ही नही जान पाए है बल्कि पूरी दुनिया जान, समझ, पायी है कि : 1947 मे आजाद हुई हमारी भारत माता की छाती पर गुलामी के कितने गहरे शूल अभी बाकी हैं ? गद्दारी और बटवारे का सपना पाले कितने अराजक तत्व देश के भीतर अभी जिन्दा है ! ऐसे अराजक तत्वों का मर्दन जरूरी हो गया है वह भी देश के गणतंत्र प्रणालि के द्वारा ! जरूरी हो गया है कि देश के गण के लिए 26 जनवरी 1950 को लागू किए गए सुंदर तंत्र का सख्ती से प्रयोग करते हुए इन अराजक चेहरो को, इन अराजक तत्वों को सबक सिखाया जाए ॥ ============================भारद्वाज अर्चिता 25/01/2020

बचपन मे दादी के मुँह से एक लोक कहावत बहुधा साँझ सवेरे सुना करती थी मै यथा :                       बसो तेरी गोद में,                     उखाडों तेरी दाढ़ी ॥  आज दिल्ली मे अराजकता का जो लाइव कास्ट हुआ उसने उपरोक्त कहावत को पूर्णत: चरितार्थ कर दिया ! क्या किसी देश का लोकतंत्र इतना उदार हो सकता है कि कुछ लोग देश के एक विशेष हिस्से को, एक विशेष भूभाग को देश से अलग करने की सामूहिक घोषणा कर रहे हो और देश धैर्य धरे मौन उनकी मूर्खतापूर्ण अराजकता को सहन कर रहा है वह भी तब जब मात्र एक दिन बाद हम दुनिया के सबसे सुंदर संविधान का स्थापना दिवस ( बर्थ डे ) मनाने की तैयारी मे लगे हो ?  आज दिल्ली मे जो हुआ है उसे केवल हम आप ही नही देख रहे है बल्कि उसपर आज सारी दुनिया की नजर पहुँची है ! आज केवल हम आप ही नही जान पाए है बल्कि पूरी दुनिया जान, समझ, पायी है कि :  1947 मे आजाद हुई हमारी भारत माता की छाती पर गुलामी के कितने गहरे शूल अभी बाकी हैं ?  गद्दारी और बटवारे का सपना पाले कितने...
नई दिल्‍ली पहुंचे ब्राजील के राष्ट्रपति बोलसोनारो, 26 जनवरी परेड में होंगे मुख्य अतिथि नई दिल्‍ली, एजेंसी ।  ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियस बोलसोनारो अपनी चार दिवसीय यात्रा पर आज नई दिल्‍ली पहुंच गए हैं। वह गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लेंगे। ब्राजील का राष्ट्रपति बनने के बाद बोलसोनारो की यह पहली भारत यात्रा होगी। उनके साथ उनकी कैबिनेट के आठ मंत्री एंव एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच 15 समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। बता दें कि यह भारत में राष्ट्रपति बोलसोनारो का पहला राजकीय दौरा है। इससे पहले 1996 और 2004 में हमारे गणतंत्र दिवस परेड में ब्राजील के राष्ट्रपति मुख्य अतिथि रह चुके हैं ।  बता दें कि 11वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह का निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। उनकी यात्रा का दूसरा दिन कई व्यस्तताओं से भरा हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी शामिल है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राज...

गण

गणतन्त्र दिवस (भारत) भारत गणराज्य द्वारा गणतंत् गणतन्त्र दिवस   भारत  का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष  26 जनवरी  को मनाया जाता है। इसी दिन सन्  1950  को  भारत सरकार अधिनियम (एक्ट)  (1935) को हटाकर  भारत का संविधान  लागू किया गया था। एक स्वतंत्र  गणराज्य  बनने और देश में  कानून  का राज स्थापित करने के लिए संविधान को  26 नवम्बर   1949  को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और  26 जनवरी  1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन  राष्ट्रीय अवकाशों  में से एक है, अन्य दो  स्‍वतंत्रता दिवस  और  गांधी जयंती  ह