वर्ष 2001 से लेकर वर्ष 2019 तक देश भर के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आंकड़े खंगालने पर एक सच जो सामने आया है वह यह कि : बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों के बीच आत्महत्या का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है ! असफलता के चलते / अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उ ठाए जाने की आखिर मुख्य वजह क्या है ?? बदलते परिवेश - परिस्थिति के साथ - साथ ही बच्चे के माता - पिता भी किस हद तक जिम्मेदार है बच्चे द्वारा उ ठाए गए इस गलत कदम के लिए ??
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तीन तरह के दबाव के चलते बोर्ड Exam मे असफल विद्यार्थी आत्महत्या के लिए हो जाता है मजबूर ! विद्यार्थियों पर पड़ने वाला तीन तरह का दबाव उन्हें आत्महत्या की तरफ ले जा रहा है। (१)अगर सफल नहीं हुए तो मित्र मंडली क्या कहेगी, (२)अगर सफल अभिभावक क्या सोचेंगे और करियर तो बीच में ही रह गया। इस बात से पैदा होने वाला तनाव रोजाना औसतन 26 विद्यार्थियों की जान ले रहा है। अधिकांश राज्यों में ऐसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। साल 2016 की बात करें तो 365 दिन में 9,474 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी। उसके बाद भी यह संख्या कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ती ही जा रही है। पिछले साल भी देश में करीब 10 हजार विद्यार्थी असहनीय दबाव और डिप्रेशन के चलते दुनिया को अलविदा कह गए। 16 से 18 साल वाले विद्यार्थी ज्यादा दबाव में विभिन्न तरह के शोध और मनोचिकित्सकों की मानें तो तीन तरह का दबाव, जो उनके आसपास ही रहता है, उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर करता है। धीरे-धीरे यह दबाव डिप्रेशन में बदलता जाता है। इस तरह के लक्ष्ण ज्यादातर 16 से 18 वर्ष और उससे उपर की आयु वाले विद्यार्थियों में देखे गए हैं। इनमें ...