19 जून 1909 को 'सोनोरा स्मार्ट डोड' ने वॉशिंगटन के शहर स्पोकेन में वाईएमसीए में आधिकारिक रूप से फादर्स डे का समारोह मनाया गया था। सोनोरा स्मार्ट डोड के पिता का नाम विलियम जैक्सन स्मार्ट था जो कि एक सिंगल पैरेंट थे, जिन्होंने अकेले अपने छह बच्चों की परवरिश की। वह ओल्ड सेंटेनरी प्रेस्बिटेरियन चर्च के सदस्य भी थे। सोनोरा स्मार्ट ने पहली बार इस दिन को मानाने का विचार का प्रस्ताव रखा। 1909 में सेंट्रल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च में 'जार्विस' ने मदर्स डे के बारे में एक उपदेश सुनाने के बाद उसने पादरी से कहा कि पिता को सम्मान देने के लिए भी एक समान अवकाश होना चाहिए। हालाँकि उसने शुरू में 5 जून को अपने पिता के जन्मदिन का सुझाव दिया था लेकिन पादरी के पास उपदेश तैयार करने के लिए पर्याप्त वक्त नहीं था और उन्होंने इस उत्सव को जून के तीसरे रविवार तक के लिए स्थगित कर दिया था !
माँ सीता के द्वारा माँ पार्वती स्तुति अयोध्याकाण्ड जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।। जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।। नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।। भव भव विभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।। [दोहा] पतिदेवता सुतीय महुँ, मातु प्रथम तव रेख। महिमा अमित न सकहिं कहि, सहस सारदा सेष।।235।। सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायिनी पुरारि पिआरी।। देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।। मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबहिं कें।। कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।। बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।। सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।। सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।। नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।। [छंद] मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु, सहज सुंदर साँवरो। करुना निधान सुजान सीलु, सनेहु जानत रावरो।। एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय, सहित हियँ हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि, मुदित मन मंदिर चली।। [सोरठा] जानि गौरि अनुकूल सिय, हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल, बाम अंग फरकन लगे।।
माँ सीता के द्वारा माँ पार्वती स्तुति अयोध्याकाण्ड जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।। जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।। नहिं तव आदि ...
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