"एक दिन मुरली श्याम बजाई, मोहे सुर नर और सकल मुनि, ओनी बदरिया छाई ..........., एक दिन मुरली श्याम बजाई !!" : ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी ! आज 24 अक्टूबर हमारी अप्पा ठुमरी साम्राज्ञी, Queen Of Thumari, ठुमरी की मल्लिका, गिरिजा देवी जी की प्रथम पुण्यतिथि है ! 8 मई 1929 को बनारस मे जन्मी, सेनिया और बनारस घराने से सम्बन्ध रखने वाली, पद्मविभूषण ( 2016 ), पद्मभूषण ( 1989 ), से सम्मानित , अपने साथ सुर एवं ठुमरी का पूरा एक दौर लेकर चलने वाली, एक काल खण्ड को जीने वाली , भारतीय शास्त्रीय गायन विधा में ठुमरी को एक नया आयाम देकर इतिहास रचने वाली कला की देवी हमारी अप्पा जी को अर्ची की तरफ से उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि सहित सादर प्रणाम !! -------------------------------------------------------------------- कलम से : भारद्वाज अर्चिता Bhardwaj@rchita 24/10/2018

"एक दिन मुरली श्याम बजाई,
मोहे सुर नर और सकल मुनि,
ओनी बदरिया छाई ...........,
एक दिन मुरली श्याम बजाई !!"
             : ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी !

आज 24 अक्टूबर हमारी अप्पा ठुमरी साम्राज्ञी, Queen Of Thumari, ठुमरी की मल्लिका, गिरिजा देवी जी की प्रथम पुण्यतिथि है !
8 मई 1929 को बनारस मे जन्मी, सेनिया और बनारस घराने से सम्बन्ध रखने वाली, पद्मविभूषण ( 2016 ), पद्मभूषण ( 1989 ), से सम्मानित ,
अपने साथ सुर एवं ठुमरी का पूरा एक दौर लेकर चलने वाली, एक काल खण्ड को जीने वाली , भारतीय शास्त्रीय गायन विधा में ठुमरी को एक नया आयाम देकर इतिहास रचने वाली कला की देवी हमारी अप्पा जी को अर्ची की तरफ से उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि सहित सादर प्रणाम  !!
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कलम से :
भारद्वाज अर्चिता
Bhardwaj@rchita
24/10/2018

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माँ सीता के द्वारा माँ पार्वती स्तुति अयोध्याकाण्ड जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।। जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।। नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।। भव भव विभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।। [दोहा] पतिदेवता सुतीय महुँ, मातु प्रथम तव रेख। महिमा अमित न सकहिं कहि, सहस सारदा सेष।।235।। सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायिनी पुरारि पिआरी।। देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।। मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबहिं कें।। कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।। बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।। सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।। सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।। नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।। [छंद] मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु, सहज सुंदर साँवरो। करुना निधान सुजान सीलु, सनेहु जानत रावरो।। एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय, सहित हियँ हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि, मुदित मन मंदिर चली।। [सोरठा] जानि गौरि अनुकूल सिय, हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल, बाम अंग फरकन लगे।।

“ सब धरती कागद करूँ , लेखनी सब बनराय । सात समुद्र की मसि करूँ , गुरु गुण लिखा न जाय ।” भावार्थ :- यदि सारी धरती को कागज़ मान लिया जाए , सारे जंगल - वनों की लकड़ी की कलम बना ली जाए तथा सातों समुद्र स्याही हो जाएँ तो भी हमारे द्वारा कभी हमारे गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते है ।हमारे जीवन मे हमारे गुरु की महिमा सदैव अनंत होती है अर्ची, गुरु का ज्ञान हमारे लिए सदैव असीम और अनमोल होता है । इस जगत मे बहुत कम ऐसे गुरू हुए है जिनको उनकी अपनी सफलता के साथ साथ ही उनके अपने शिष्य की सफलता से पहचान मिली हो ऐसे ही भाग्यशाली गुरू रहे है “रमाकान्त आचरेकर” जिन्हे पूरी दुनिया सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट कोच “ क्रिकेट गुरू ” के रूप मे जानती है और इसी रूप मे ही सदैव याद भी रखना चाहती है ! ईश्वर के साम्राज्य मे पहुँचने पर आज गुरू आचरेकर का स्वागत नाराण ने निश्चित तौर पर यही कह कर किया होगा “ क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के गुरू रमाकान्त आचरेकर जी आईए आपका स्वागत है !!” दिवंगत आचरेकर जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि !! ================================ Bhardwaj@rchita 03/01/2019

जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में आस लागल हो॥ आज के दिनवा सुहावन, रतिया लुभावन हो, ललना दिदिया के होरिला जनमले, होरिलवा बडा सुन्दर हो॥ नकिया त हवे जैसे बाबुजी के,अंखिया ह माई के हो ललन मुहवा ह चनवा सुरुजवा त सगरो अन्जोर भइले हो॥ सासु सुहागिन बड भागिन, अन धन लुटावेली हो ललना दुअरा पे बाजेला बधइया, अन्गनवा उठे सोहर हो॥ नाची नाची गावेली बहिनिया, ललन के खेलावेली हो ललना हंसी हंसी टिहुकी चलावेली, रस बरसावेली हो॥ जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में आस लागल हो॥