सोशल मीडिया “Social Media” एवम् Privacy Of Newsroom ===================

सोशल मीडिया “Social Media”
एवम् Privacy Of Newsroom
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समाचार जगत में Newsroom की Privacy को Maintain रखते हुए जब खबर वायरल की जाती है, प्रकाशित की जाती हैं , तो वह वाकई समाचार होती है ! लेकिन Newsroom की Privacy को जब Social कर दिया जाय तो एक सवाल उठना लाजमी है कि इससे
: क्या खबर की ताजगी बची रहती है ??
: क्या खबर की विश्वसनीयता बची रहती है ?? 
: क्या न्यूजरूम की की गरीमा एवम गोपनियता बची        रहती है ??
मैं उसी न्यूजरूम की गोपनियता की बात कर रही हूं जिस के बारे में पढाया गया था कि :
हमारा दायां हाथ क्या लिख रहा है, उसके विषय में हमारे बाएं हाथ को तबतक खबर नही होनी चाहिए जब तक अखबार पाठक के हाथ मे न पहुंच जाए ! जब तक खबर एअर न कर दी जाए !
लेकिन पिछले 9 साल से जिस तरह Social Media का वर्चस्व हुआ है उसने हर पल न्यूज रूम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है अर्ची ! क्योंकि खबर का सोशल होना ठीक है पर न्यूजरूम का सोशल हो जाना अथवां  Social Media का न्यूजरूम बन जाना Media जगत की सेहत के लिए ठीक नही !

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“ सब धरती कागद करूँ , लेखनी सब बनराय । सात समुद्र की मसि करूँ , गुरु गुण लिखा न जाय ।” भावार्थ :- यदि सारी धरती को कागज़ मान लिया जाए , सारे जंगल - वनों की लकड़ी की कलम बना ली जाए तथा सातों समुद्र स्याही हो जाएँ तो भी हमारे द्वारा कभी हमारे गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते है ।हमारे जीवन मे हमारे गुरु की महिमा सदैव अनंत होती है अर्ची, गुरु का ज्ञान हमारे लिए सदैव असीम और अनमोल होता है । इस जगत मे बहुत कम ऐसे गुरू हुए है जिनको उनकी अपनी सफलता के साथ साथ ही उनके अपने शिष्य की सफलता से पहचान मिली हो ऐसे ही भाग्यशाली गुरू रहे है “रमाकान्त आचरेकर” जिन्हे पूरी दुनिया सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट कोच “ क्रिकेट गुरू ” के रूप मे जानती है और इसी रूप मे ही सदैव याद भी रखना चाहती है ! ईश्वर के साम्राज्य मे पहुँचने पर आज गुरू आचरेकर का स्वागत नाराण ने निश्चित तौर पर यही कह कर किया होगा “ क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के गुरू रमाकान्त आचरेकर जी आईए आपका स्वागत है !!” दिवंगत आचरेकर जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि !! ================================ Bhardwaj@rchita 03/01/2019

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